Category: Rajasthan GK

परिवहन

परिवहन माल, मनुष्य व संदेशों को एक स्थान से दुसरे स्थान पर ले जाने की प्रक्रिया परिवहन कहलाती है। राजस्थान में मुख्य रूप से 3 प्रकार का परिवहन है सड़क रेल वायु सड़क परिवहन राजस्थान में सर्वप्रथम राजकीय बस सेवा 1952 में टोंक में प्रारम्भ की गई। राज्य सरकार द्वारा 1994 में सड़क निति घोषित

राजस्थानी भाषा एवं बोलियां

राजस्थानी भाषा एवं बोलियां राजस्थानी भाषा की उत्पति शौरसेनी गुर्जर अपभ्रंश से मानी जाती है। उपभ्रंश के मुख्यतः तीन रूप नागर, ब्राचड़ और उपनागर माने जाते हैं। नागर के अपभ्रंश से सन् 1000 ई. के लगभग राजस्थानी भाषा की उत्पति हुई। राजस्थानी एवं गुजराती का मिला-जूला रूप 16 वीं सदी के अंत तक चलता रहा।

राजस्थान के प्रमुख सांस्कृतिक कार्यक्रम स्थल

राजस्थान के प्रमुख सांस्कृतिक कार्यक्रम स्थल 1. जवाहर कला केन्द्र-जयपुर स्थापना – 1993 ई. इस संस्था द्वारा सर्वाधिक सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन किया जाता है। 2. जयपुर कत्थक केन्द्र-जयपुर स्थापना -1978 ई. 3. रविन्द्र मंच- जयपुर स्थापना -1963 ई. 4. राजस्थान संगीत संस्थान- जयपुर स्थापना 1950 ई. 5. पारसी रंग मंच – जयपुर स्थापना-1878 ई.

छतरियां , महल &हवेलियां

छतरियां 1. गैटोर की छतरियां नाहरगढ़ (जयपुर) में स्थित है। ये कछवाहा शासको की छतरियां है। जयसिंह द्वितीय से मानसिंह द्वितीय की छतरियां है। 2. बड़ा बाग की छतरियां जैसलमेर में स्थित है। यहां भाटी शासकों की छतरियां स्थित है। 3. क्षारबाग की छतरियां कोटा में स्थित है। यहां हाड़ा शासकों की छतरियां स्थित है।

राजस्थान में हस्तकला

राजस्थान में हस्तकला 1. सोना, चांदी ज्वैलरी स्वर्ण और चांदी के आभूषण – जयपुर थेवा कला – प्रतापगढ़ कांच पर हरे रंग से स्वर्णिम नक्काशी कुन्दन कला – जयपुर स्वर्ण आभुषणों पर रत्न जड़ाई करना। कोफ्तगिरी – जयपुर, अलवर। फौलाद की वस्तुओं पर सोने के तार की जड़ाई करना। तहरिशां – अलवर, उदयपुर डिजायन को

लोक गीत

लोक गीत 1. झोरावा गीत जैसलमेर क्षेत्र का लोकप्रिय गीत जो पत्नी अपने पति के वियोग में गाती है। 2. सुवटिया उत्तरी मेवाड़ में भील जाति की स्त्रियां पति -वियोग में तोते (सूए) को संबोधित करते हुए यह गीत गाती है। 3. पीपली गीत मारवाड़ बीकानेर तथा शेखावटी क्षेत्र में वर्षा ऋतु के समय स्त्रियों

लोक कलाएं

लोक कलाएं 1. फड़ चित्रांकन रेजी अथवा खादी के कपडे़ पर लोक देवता के जीवन को चित्रों के माध्यम से प्रस्तुत करना फड़ चित्रांकन कहलाता है। फड़ चित्रांकन में मुख्य पात्र को लाल रंग में तथा खलनायक को हरे रंग में दर्शाया जाता है। फड का वाचन करने वाले भोपा तथा भोपी कहलाते है। राज्य

राजस्थान की चित्र शैलियां

राजस्थान की चित्र शैलियां राजस्थान में प्राचीनतम चित्रण के अवशेष कोटा के आसपास चंबल नदी के किनारे की चट्टानों पर मुकन्दरा एवं दर्रा की पहाड़ीयों, आलनियां नदी के किनार की चट्टानों आदि स्थानों पर मिले हैं। राजस्थान में उपलब्ध सर्वाधिक प्राचिनतम चित्रित ग्रंथ जैसलमेर भंडार में 1060 ई. के ‘ओध निर्युक्ति वृत्ति’ एवं ‘दस वैकालिका

प्रमुख वादक

प्रमुख वादक तबला वादकः- जाकिर हुसैन, पं. किशन महाराज सरोद वादक:- अमजद अली, अकबर अली सितार वादक:- पं. रवि शंकर, पं. विश्व मोहन भट्ट, विलायत खां साखी वादक:- पं. रामनारायण (पद्य भूषण), सुल्तान खां (जोधपुर) बांसुरी वादकः- हरी प्रसाद चैरसिया, पन्ना लाल घोष शहनाई वादक:- बिस्मिल्लाह खां सतुर वादक:- पं. शिव कुमार शर्मा प्रमुख संगीत

वाद्य यंत्र

वाद्य यंत्र वाद्य यंत्रों को मुख्यतः चार श्रेणियों में बांटा जा सकता है। 1. तत् वाद्य यंत्र तार युक्त वाद्य यंत्र -यथा- सितार, इकतारा, वीणा, कमायचा, सांगरी, इत्यादि। 2. सुषिर वाद्य यंत्र हवा द्वारा बजने वाले यंत्र – यथा, बांसुरी, शहनाई, पूंगी 3. अवनद्ध वाद्य यंत्र चमडे़ से मढे़ हुए वाद्य यंत्र – यथा ढोल,

राजस्थान में लोकनाट्य

राजस्थान में लोकनाट्य 1. रम्मत- होली के अवसर पर खेली जाती है। ढोल व नगाडे। प्रसंग- चैमासा, लावणी, गणपति वंदना मूलस्थान- बीकानेर व जैसलमेर बीकानेर के पुष्करणा ब्राहा्रण तथा जैसलमेर की रावल जाति रम्मत में दक्ष मानी जाति है। प्रमुख रम्मते व उनके रचनाकार स्वतंत्र बावनी, मूमल व छेले तम्बोलन – तेज कवि (जैसलमेर) द्वारा

राजस्थान में नृत्य

राजस्थान में नृत्य नृत्य भी मानवीय अभिव्यक्तियों का एक रसमय प्रदर्शन है। यह एक सार्वभौम कला है, जिसका जन्म मानव जीवन के साथ हुआ है। बालक जन्म लेते ही रोकर अपने हाथ पैर मार कर अपनी भावाभिव्यक्ति करता है कि वह भूखा है- इन्हीं आंगिक -क्रियाओं से नृत्य की उत्पत्ति हुई है। यह कला देवी-देवताओं,

भारत की प्रमुख संगीत गायन शैलियां

भारत की प्रमुख संगीत गायन शैलियां 1. ध्रुपद गायन शैली जनक – ग्वालियर के शासक मानसिंह तोमर को माना जाता है। महान संगीतज्ञ बैजू बावरा मानसिंह के दरबार में था। संगीत सामदेव का विषय है। कालान्तर में ध्रुपद गायन शैली चार खण्डों अथवा चार वाणियां विभक्त हुई। (अ) गोहरवाणी उत्पत्ति- जयपुर जनक- तानसेन (ब) डागुर वाणी उत्पत्ति-

राजस्थान के दुर्ग

राजस्थान के दुर्ग राजस्थान के राजपूतों के नगरों और प्रासदों का निर्माण पहाडि़यों में हुआ, क्योकि वहां शुत्रओं के विरूद्ध प्राकृतिक सुरक्षा के साधन थे। शुक्रनीति में दुर्गो की नौ श्रेणियों का वर्णन किया गया। एरण दूर्ग खाई, कांटों तथा कठौर पत्थरों से युक्त जहां पहुंचना कठिन हो जैसे – रणथम्भौर दुर्ग। पारिख दूर्ग जिसके

राजस्थान की जनजातियां

राजस्थान की जनजातियां 1. मीणा निवास स्थान- जयपुर के आस-पास का क्षेत्र/पूर्वी क्षेत्र “मीणा” का शाब्दिक अर्थ मछली है। “मीणा” मीन धातु से बना है। मीणा जनजाति के गुरू आचार्य मुनि मगन सागर है। मीणा पुराण- आचार्य मुनि मगन सागर द्वारा रचित मीणा जनजाति का प्रमुख ग्रन्थ है। जनजातियों में सर्वाधिक जनसंख्या वाली जनजाति है।

आभूषण & वेश भूषा

आभूषण & वेश भूषा आभूषण 1. सिर के आभूषण 1.शीशफूल 2. रखडी (राखड़ी) 3 बोर 4 टिकड़ा 5. मेमन्द 2. माथा/ मस्तक के आभूषण 1 बोरला 2 टीका 3 मांग टीका 4 दामिनी 5 सांकली 6 फीणी 7 टिडी भलको 8 बिन्दी 3. नाक के आभूषण 1 बेसरि / बसेरी 2 नथ 3 चोप 4

राजस्थान में प्रचलित रीति -रिवाज & प्रथाएं

राजस्थान में प्रचलित रीति -रिवाज & प्रथाएं रीति -रिवाज गर्भाधान पुंसवन- पुत्र प्राप्ति हेतू सिमन्तोउन्नयन- माता व गर्भरथ शिशु की अविकारी शक्तियों से रक्षा करने के लिए। जातकर्म नामकरण निष्कर्मण- शिशु को जन्म के बाद पहली बार घर से बाहर ले जाने के लिए। अन्नप्रसान्न- पहली बार अन्न खिलाने पर (बच्चे को) जडुला/ चुडाकर्म –

राजस्थान के मेले

राजस्थान के मेले (अ) राज्य के पशु मेले 1. श्रीबलदेव पशु मेला मेड़ता सिटी (नागौर) में आयोजित होता है। इस मेले का आयोजन चेत्र मास के सुदी पक्ष में होता हैं नागौरी नस्ल से संबंधित है। 2. श्री वीर तेजाजी पशु मेला परबतसर (नागौर) में आयोजित होता है। श्रावण पूर्णिमा से भाद्रपद अमावस्या तक चलता

राजस्थान में त्यौहार

राजस्थान में त्यौहार महिने चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ, आषाठ, श्रावण, भाद्रपद, आषिवन, कार्तिक, मार्गशीर्ष, पौष, माघ, फाल्गुन । (बदी) कृष्ण पक्ष – अमावस्या(15) (सुदी) शुक्ल पक्ष – पूर्णिमा(30) प्रत्येक महीने में 30 दिन होते है- प्रतिपदा(एकम), द्वितीया, तृतीया, चतुर्थी, पंचमी, षष्ठी, सप्तमी, अस्ठमी, नवमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी, त्रयोदशी, चतुर्थदशी, अमावस्या/पूर्णिमा। हिन्दी तारीख के लिए उदाहरण महीना-पक्ष-तिथी :

राजस्थान में सम्प्रदाय

राजस्थान में सम्प्रदाय 1. जसनाथी सम्प्रदाय संस्थापक – जसनाथ जी जाट जसनाथ जी का जन्म 1432 ई. में कतरियासर (बीकानेर) में हुआ। प्रधान पीठ – कतरियासर (बीकानेर) में है। यह सम्प्रदाय 36 नियमों का पालन करता है। पवित्र ग्रन्थ सिमूदड़ा और कोडाग्रन्थ है। इस सम्प्रदाय का प्रचार-प्रसार ” परमहंस मण्डली” द्वारा किया जाता है। इस

राजस्थान में लोक देवियां

राजस्थान में लोक देवियां 1.करणी माता देश नोक (बीकानेर) में इनका मंदिर है। चुहों वाली देवी के नाम से प्रसिद्ध है। बीकानेर के राठौड़ वंश की कुल देवी मानी जाती है। करणी माता के मंदिर का निर्माण कर्ण सिंह न करवाया तथा इस मंदिर का पूर्निर्माण महाराजा गंगा सिंह द्वारा करवाया गया। पुजारी – चारण

राजस्थान में लोक देवता

राजस्थान में लोक देवता मारवाड़ के पंच पीर रामदेव जी, गोगा जी, पाबु जी,हरभू जी, मेहा जी 1. बाबा रामदेव जी जन्म- उपडुकासमेर, शिव तहसील (बाड़मेर) में हुआ। रामदेव जी तवंर वंशीय राजपूत थे। पिता का नाम अजमल जी व माता का नाम मैणादे था। इनकी ध्वजा, नेजा कहताली हैं नेजा सफेद या पांच रंगों

राजस्थान में पर्यटन विकास

राजस्थान में पर्यटन विकास राजस्थान पर्यटन विभाग का पंचवाक्य – “जाने क्या दिख जाये”। राजस्थान में सर्वाधिक पर्यटक(देशी व विदेशी दोनों) – 1. पुष्कर – अजमेर 2. माउण्ट आबू – सिरोही। राजस्थान में सर्वाधिक विदेशी पर्यटक – जयपुर शहर में आते हैं। राजस्थान में सर्वाधिक विदेशी पर्यटक – 1. फ्रांस 2. ब्रिटेन से आते हैं।

राजस्थान में वित्तीय संगठन

राजस्थान में वित्तीय संगठन राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास एवं विनियोजन निगम(RIICO रिको) स्थापना – 1969 में मुख्यालय – जयपुर में कार्य राजस्थान में औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना एवं विकास करना औद्योगिक क्षेत्रों में आधारभुत अव्यय संरचना अपलब्ध करना प्रोजेक्ट की तस्वीर एवं रूपरेखा तैयार करना राजस्थान में औद्योगिक आवासीय बस्तीयों की स्थापना करना राजस्थान के

राजस्थान में औद्योगिक विकास

राजस्थान में औद्योगिक विकास निर्यात संवंद्र्धन एवं औद्योगिक पार्क(EPIP) सहयोग – भारत सरकार स्थित सीतापुरा, जयपुर – भारत का प्रथम 1997 में। बोरानाड़ा , जोधपुर नीमराणा, अलवर विशेष आर्थिक क्षेत्र(SEZ) महिद्रा वल्र्ड सिटी, जयपुर – सुचना प्रौद्योगिकी हेतू महिद्रा वल्र्ड सिटी, जयपुर – हेण्डीक्राफ्ट हेतू महिन्द्रा वल्र्ड सिटी, जयपुर – ओटो मोबाइल हेतू सीतापुरा फेज

राजस्थान में ऊर्जा विकास

राजस्थान में ऊर्जा विकास राजस्थान के सर्वाधिक ऊर्जा प्राप्ति वाले स्त्रोत ताप विधुत जल विधुत राजस्थान में सर्वाधिक ऊर्जा की संभावना वाला स्त्रोत सौर ऊर्जा पवन ऊर्जा बायो गैंस राजस्थान में ग्रामिण क्षेत्रों में ऊर्जा की संभावना वाला स्त्रोत – बायोगैंस राजस्थान में सर्वाधिक बायोगैस प्लांट वाले जिले – उदयपुर जयपुर राजस्थान में दुसरा परमाणु

खनिज संसाधन

खनिज संसाधन राजस्थान खनिज की दृष्टि से एक सम्पन्न राज्य है। राजस्थान को “खनिजों का अजायबघर” कहा जाता है। राजस्थान में लगभग 67(44 प्रधान + 23 लघु) खनिजों का खनन होता है। देश के कुल खनिज उत्पादन में राजस्थान का योगदान 22 प्रतिशत है। खनिज भण्डारों की दृष्टि से झारखण्ड के बाद दुसरा स्थान है।

पशु सम्पदा

पशु सम्पदा राजस्व मण्डल अजमेर- प्रत्येक 5 वर्ष में पशुगणना करता है। 19 वीं पशुगणना 15 सितम्बर से 15 अक्टूबर 2012 तक की गई। 18 वीं पशुगणना 2007 में आयोजित की गई जो नस्ल के आधार पर प्रथम गणना थी। भारत में प्रथम पशुगणना 1919 में आयोजित की गई। तब राज्य की कुछ रियासतों ने

राजस्थान में कृषि

राजस्थान में कृषि राजस्थान का कुल क्षेत्रफल 3 लाख 42 हजार 2 सौ 39 वर्ग कि.मी. है। जो की देश का 10.41 प्रतिशत है। राजस्थान में देश का 11 प्रतिशत क्षेत्र कृषि योग्य भूमि है और राज्य में 50 प्रतिशत सकल सिंचित क्षेत्र है जबकि 30 प्रतिशत शुद्ध सिंचित क्षेत्र है। राजस्थान का 60 प्रतिशत

वन्य जीव अभ्यारण्य

वन्य जीव अभ्यारण्य वन्य जीवों से सम्बन्धित महत्वपूर्ण तथ्य 23 अप्रैल 1951 को राजस्थान वन्य-पक्षी संरक्षण अधिनियम 1951 लागु किया गया। भारत सरकार द्वारा 9 सितम्बर 1972 को वन्य जीव सुरक्षा अधिनियम 1972 लागु किया गया। इसे राजस्थान में 1 सितम्बर, 1973 को लागु किया गया। 42 वां संविधान संशोधन, 1976 के द्वारा वन को

वन

वन भारत में सबसे ज्यादा वन मध्यप्रदेश और सबसे कम हरियाणा में हैं। राजस्थान का वन क्षेत्र की दृष्टि से देश में नौंवा स्थान है। राज्य में 32649 वर्ग किमी क्षेत्र यानी लगभग 9.54 प्रतिशत भू-भाग पर वन हैं जिसमें से भी अत्यधिक सघन वन क्षेत्र 72 वर्ग किमी या 0.02 प्रतिशत व सघन वन

राजस्थान जनगणना – 2011

राजस्थान जनगणना – 2011 राजस्थान की कुल जनसंख्या – 68,548,437 शहरी जनसंख्या – 17,048,085(कुल जनसंख्या का 24.9 प्रतिशत) पुरूष – 8,909,250(25.1 प्रतिशत) महिला – 8,138,835(24.7 प्रतिशत) ग्रामीण जनसंख्या – 51,500,352(कुल जनसंख्या का 75.1 प्रतिशत) पुरूष – 26,641,747(74.9 प्रतिशत) महिला – 24,858,605(75.3 प्रतिशत) सर्वाधिक जनसंख्या वाले जिले जयपुर 66.26 लाख जोधपुर 36.87 लाख अलवर 36.74 लाख

राजस्थान का एकीकरण

राजस्थान का एकीकरण राजस्थान के एकीकरण के समय कुल 19 रियासतें 3 ठिकाने- लावा(जयपुर), कुशलगढ़(बांसवाड़ा) व नीमराना(अलवर) तथा एक चीफशिफ अजमेर-मेरवाड़ा थे। तथ्य भारत के एकीकरण के समय कुल 562 रियासत थी। क्षेत्रफल में सबसे बड़ी रियासत हैदराबाद थी व क्षेत्रफल में सबसे छोटी रियासत बिलवारी(मध्यप्रदेश) थी। राजस्थान का एकीकरण 7 चरणों में पुरा हुआ।इसके

प्रजामण्डल आन्दोलन

प्रजामण्डल आन्दोलन प्रजामण्डल प्रजामण्डल का अर्थ है प्रजा का मण्डल(संगठन)।1920 के दशक में ठिकानेदारों और जागीरदारों के अत्याचार दिन प्रतिदिन बढ़ रहे थे। इसी के कारण किसानों द्वारा विभिन्न आंदोलन चलाये जा रहे थे साथ ही गांधी जी के नेतृत्व में देश में स्वतंत्रता आन्दोलन भी चल रहा था। इन सभी के कारण राज्य की प्रजा में

राजस्थान में किसान आन्दोलन

राजस्थान में किसान आन्दोलन बिजौलिया किसान आन्दोलन – (1897-1941 44 वर्षों तक) जिला – भीलवाड़ा बिजौलिया का प्राचीन नाम – विजयावल्ली संस्थापक – अशोक परमार बिलौलिया, मेवाड़ रियासत का ठिकाना था। कारण लगान की दरे अधिक थी। लाग-बाग कई तरह के थे। बेगार प्रथा का प्रचलन था। बिलौलिया किसानों से 84 प्रकार का लाग-बाग(टैक्स) वसुल

1857 की क्रान्ति

1857 की क्रान्ति अग्रेजों की अधीनता स्वीकार करने वाली प्रथम रियासत – करौली(1817) सम्पूर्ण भारत में 562 देशी रियासते थी तथा राजस्थान में 19 देशी रियासत थी। 1857 की क्रान्ति के समय ए.जी.जी. – सर जार्ज पैट्रिक लारेन्स(राजस्थान, ए. जी. जी. का मुख्यालय – अजमेर में) राजपुताना का पहला ए. जी. जी. – जनरल लाॅकेट 1857 की

बीकानेर का राठौड़ वंश

बीकानेर का राठौड़ वंश संस्थापक राव बीका (जोधा का पांचवां पुत्र) 1468 ई. में बीकानेर नगर बसाया राव लूणकर्ण (कलियुग का कर्ण) राव जैतसी) राव जैतसी रो छंद-बीठू सोज नागरजोत 1542 पाहोबा का युद्ध राव जैतसी व मालदेव के मध्य हुआ। कल्याण मल रायसिंह 1465 ई. में जोधपुर के संस्थापक राव जोधा के पांचवे पुत्र

मारवाड का राठौड वंश

मारवाड का राठौड वंश संस्थापक – रावसीहा राजधानी – मंडौर मंडौर में रावण का पुतला नहीं जलाया जाता है। राजस्थान के पश्चिमी भाग में जोधपुर नागौर पाली का क्षेत्र मारवाड़ के रूप में जाना जाता है। यहीं पर 12 वीं. सदी में राठौड वंश की स्थापना हुई। कर्नल जेम्स टोड के अनुसार कन्नौज के गहडवाल

सांभर का चौहान वंश

सांभर का चौहान वंश चौहानों की उत्पति के संबंध में विभिन्न मत हैं। पृथ्वीराज रासौ(चंद्र बरदाई) में इन्हें ‘अग्निकुण्ड’ से उत्पन्न बताया गया है, जो ऋषि वशिष्ठ द्वारा आबू पर्वत पर किये गये यज्ञ से उत्पन्न हुए चार राजपूत – प्रतिहार, परमार,चालुक्य एवं चौहानों(हार मार चाचो – क्रम) में से एक थे। मुहणोत नैणसी एवं सूर्यमल मिश्रण

आमेर का कछवाह वंश

आमेर का कछवाह वंश संस्थापक – धौलाराय (दूल्हेराय तेजकरण) राजधानी -दौसा कोकिलदेव – आमेर राजधानी 1207 ई. में नरवर (नरूका) ,शेखा (शेखावत) शेखावाटी की स्थापना की। राजस्थान के पूर्वी भाग में जहां ढूढ नदी बहती थी उस क्षेत्र को ढूढाड़ के नाम से जाना जाता है। यहीं पर 1137 ई. में दुल्हाराय ने कछवाह वंश

राजपूत युग

राजपूत युग 47 ई. में हर्षवर्धन की मृत्यु के उपरान्त उसका सम्पूर्ण साम्राज्य छोटे-2 अनेक राज्यों में बट गया। जिसमें अधिकांश राज्य राजपूत जाति के थे। अतः 7 वी से 12 वीं सदी भारतीय इतिहास में राजपूत युग के नाम से जानी जाती है। राजपूतो की उत्पत्ति 1. भारतीय उत्पत्ति a. प्राचीन क्षेत्रियों से जी.एच.

गुर्जर प्रतिहार वंश

गुर्जर प्रतिहार वंश संस्थापक- हरिशचन्द्र वास्तविक – नागभट्ट प्रथम (वत्सराज) पाल -धर्मपाल राष्ट्रकूट-ध्रव प्रतिहार-वत्सराज राजस्थान के दक्षिण पश्चिम में गुर्जरात्रा प्रदेश में प्रतिहार वंश की स्थापना हुई। ये अपनी उत्पति लक्ष्मण से मानते है। लक्षमण राम के प्रतिहार (द्वारपाल) थे। अतः यह वंश प्रतिहार वंश कहलाया। नगभट्ट प्रथम पश्चिम से होने वाले अरब आक्रमणों को

राजस्थान का इतिहास जानने के स्त्रोत

राजस्थान का इतिहास जानने के स्त्रोत राजस्थान इतिहास को जानने के स्त्रोतः- इतिहास का शाब्दिक अर्थ- ऐसा निश्चित रूप से हुआ है। इतिहास के जनक यूनान के हेरोडोटस को माना जाता हैं लगभग 2500 वर्ष पूर्व उन्होने ” हिस्टोरिका” नामक ग्रन्थ की रचना की । इस ग्रन्थ में उन्होने भारत का उल्लेख भी किया हैं।

प्राचीन सभ्यताऐं

प्राचीन सभ्यताऐं कालीबंगा सभ्यता जिला – हनुमानगढ़ नदी – सरस्वती(वर्तमान की घग्घर) समय – 3000 ईसा पूर्व से 1750 ईसा पूर्व तक काल – कास्य युगीन काल खोजकर्ता – 1952 अमलानन्द घोस उत्खनन कर्ता – (1961-69) बी. बी. लाल, वी. के. थापर बी. बी. लाल – बृजबासी लाल बी. के. थापर – बालकृष्ण थापर शाब्दीक

राजस्थान की सिचाई परियोजनाऐं

राजस्थान की सिचाई परियोजनाऐं परिभाषा वर्षा के अभाव में भूमि को कृत्रिम तरीके से जल पीलाने की क्रिया को सिंचाई करना कहा जाता है। सिंचाई आधारभूत संरचना का अंग है। योजनाबद्ध विकास के 60 वर्षो के बाद भी राजस्थान आधारभूत संरचना की दृष्टि से भारत के अन्य राज्यों के मुकाबले पिछड़ा हुआ है। राज्य में

राजस्थान की नदियां(आंतरिक प्रवाह तंत्र की नदियां)

राजस्थान की नदियां(आंतरिक प्रवाह तंत्र की नदियां) वे नदियों जिनका जल समुद्र तक नहीं पहुँच पाता है, अपने प्रवाह क्षेत्र मे ही विलुप्त हो जाती है, उन्हें आन्तरिक प्रवाह की नदियां कहते है घग्घर नदी उपनाम: सरस्वती, दृषद्धती, मृतनदी, नट नदी उद्गम: शिवालिका श्रेणी कालका (हिमांचल-प्रदेश) कुल ल. : 465 कि.मी. कालीबंगा सभ्यता का विकास

राजस्थान की नदियां(अरब सागर तंत्र की नदियां)

राजस्थान की नदियां(अरब सागर तंत्र की नदियां) लूनी नदी उपनाम:- लवणवती, सागरमती/मरूआशा/साक्री कुल लम्बाई:- 495 कि.मी. राजस्थान में लम्बाई:- 330 कि.मी. पश्चिम राजस्थान की गंगा, रेगिस्तान की गंगा, आधी मीठी आधी खारी बहाव:- अजमेर, नागौर, जोधपुर, पाली, बाड़मेर, जालौर पश्चिम राजस्थान की सबसे लम्बी नदी है। पश्चिम राजस्थान की एकमात्र नदी लूनी नदी का उद्गम

राजस्थान की नदियां

राजस्थान की नदियां राजस्थान का अधिकांश भाग रेगिस्तानी है अतः वहां नदीयों का विशेष महत्व है। पश्चिम भाग में सिचाई के साधनों का अभाव है परिणाम स्वरूप यहां नदीयों का महत्व ओर भी बढ़ जाता है। प्राचीन समय से ही नदियों का विशेष महत्व रहा |राजस्थान में महान जलविभाजक रेखा का कार्य अरावली पर्वत माला

राजस्थान की झीले

राजस्थान की झीले राजस्थान में प्राचीन काल से ही लोग जल स्रोतों के निर्माण को प्राथमिकता देते थे। इस कार्य से संबंधित शब्दों पर एक नजर। मीरली या मीरवी- तालाब, बावड़ी, कुण्ड आदि के लिए उपयुक्त स्थान का चुनाव करने वाला व्यक्ति। कीणिया- कुआँ खोदने वाला उत्कीर्णक व्यक्ति। चेजारा- चुनाई करने वाला व्यक्ति। राजस्थान की

राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों के भौगोलिक नाम

राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों के भौगोलिक नाम भोराठ/भोराट का पठार:- उदयपुर के कुम्भलगढ व गोगुन्दा के मध्य का पठारी भाग। लासडि़या का पठारः- उदयपुर में जयसमंद से आगे कटा-फटा पठारी भाग। गिरवाः- उदयपुर में चारों ओर पहाडि़यों होने के कारण उदयपुर की आकृति एक तश्तरीनुमा बेसिन जैसी है जिसे स्थानीय भाषा में गिरवा कहते है। देशहरोः- उदयपुर में जरगा(उदयपुर)

राजस्थान के भौतिक विभाग

राजस्थान के भौतिक विभाग पृथ्वी अपने निर्माण के प्रराम्भिक काल में एक विशाल भू-खण्ड पैंजिया तथा एक विशाल महासागर पैंथालासा के रूप में विभक्त था कलांन्तर में पैंजिया के दो टुकडे़ हुए उत्तरी भाग अंगारालैण्ड तथा दक्षिणी भाग गोडवानालैण्ड के नाम जाना जाने लगा। तथा इन दोनों भू-खण्डों के मध्य का सागरीय क्षेत्र टेथिस सागर

राजस्थान की जलवायु

राजस्थान की जलवायु राजस्थान की जलवायु शुष्क से उपआर्द्र मानसूनी जलवायु है अरावली के पश्चिम में न्यून वर्षा, उच्च दैनिक एवं वार्षिक तापान्तर निम्न आर्द्रता तथा तीव्रहवाओं युक्त जलवायु है। दुसरी और अरावली के पुर्व में अर्द्रशुष्क एवं उपआर्द्र जलवायु है। जलवायु को प्रभावित करने वाले कारक – अक्षांशीय स्थिती, समुद्रतल से दुरी, समुद्र तल

राजस्थान के प्रतीक चिन्ह

राजस्थान के प्रतीक चिन्ह राज्य वृक्ष – खेजड़ी “रेगिस्तान का गौरव” अथवा “थार का कल्पवृक्ष” जिसका वैज्ञानिक नाम “प्रोसेसिप-सिनेरेरिया” है। इसको 1983 में राज्य वृक्ष घोषित किया गया। खेजड़ी के वृक्ष सर्वाधिक शेखावटी क्षेत्र में देखे जा सकते है तथा नागौर जिले सर्वाधिक है। इस वृक्ष की पुजा विजयाशमी/दशहरे पर की जाती है। खेजड़ी के

राजस्थान के संभाग

राजस्थान के संभाग जयपुर संभाग- जयपुर, दौसा, सीकर, अलवर, झुंझुनू जोधपुर संभाग- जोधपुर, जालौर, पाली, बाड़मेर, सिरोही, जैसलमेर भरतपुर संभाग- भरतपुर, धौलपुर, करौली, सवाईमाधोपुर अजमेर संभाग- अजमेर, भीलवाड़ा, टोंक, नागौर कोटा संभाग- कोटा, बुंदी, बांरा, झालावाड़ बीकानेर संभाग- बीकानेर, गंगानगर, हनुमानगढ़, चुरू उदयपुर संभाग- उदयपुर, राजसंमद, डूंगरपुर, बांसवाड़ा,चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़ अन्तर्राष्ट्रीय सीमा अन्तर्राष्ट्रीय सीमा बनाने वाले

राजस्थान की अन्य राज्य से सीमा

राजस्थान की अन्य राज्य से सीमा 26 जनवरी 1950 को संविधानिक रूप से हमारे राज्य का नाम राजस्थान पडा। राजस्थान अपने वर्तमान स्वरूप में 1 नवंम्बर 1956 को आया। इस समय राजस्थान में कुल 26 जिले थे। 26 वां जिला-अजमेर-1 नवंम्बर, 1956 27 वां जिला-धौलपुर-15 अप्रैल, 1982, यह भरतपुर से अलग होकर नया जिला बना।

राजस्थान का सामान्य परिचय

राजस्थान का सामान्य परिचय राजस्थान क्षेत्रफल की दृष्टि से हमारे देश का सबसे बड़ा राज्य है। राजस्थान देश के उत्तर पश्चिम में स्थित है। छठी सताब्दी के बाद राजस्थानी भू भाग में राजपूत राज्यों का उदय प्रारंभ हुआ । राजपूत राज्यों की प्रधानता के कारण इसे राजपुताना कहा जाने लगा । वाल्मीकि ने राजस्थान प्रदेश को ‘मरुकांतर’